धार्मिक पर्यटन में लक्जरी का बूम: 2030 तक अयोध्या-काशी में दोगुने होंगे ब्रांडेड होटल
आज की युवा पीढ़ी अध्यात्म के साथ-साथ सहूलियत और 'स्पिरिचुअल वेलनेस' भी चाहती है। मेकमायट्रिप (MakeMyTrip) की रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या, वाराणसी, वृंदावन और द्वारका जैसे धार्मिक शहरों में लक्जरी होटलों (10 हजार रुपये प्रति रात से ऊपर) की बुकिंग में 25% तक का उछाल आया है। फिलहाल इन शहरों में ब्रांडेड होटलों की हिस्सेदारी महज 6% है, जो अगले 4 से 5 सालों में बढ़कर 14% (दोगुने से ज्यादा) होने की उम्मीद है।
दिग्गज होटल कंपनियों का भारी निवेश:
टाटा ग्रुप (Taj/Vivanta): अयोध्या में 162 कमरों का प्रीमियम होटल खुल चुका है, और 7.2 एकड़ में 300 कमरों का भव्य ताज होटल बनाया जा रहा है। वृंदावन में भी बांके बिहारी मंदिर के पास 135 कमरों का 'विवांता' होटल तैयार हो रहा है।
ITC होटल्स: अयोध्या में 143 कमरों के 'वेलकम होटल' के लिए करार किया गया है। बोधगया और शिरडी में भी नई प्रॉपर्टीज बन रही हैं।
ग्लोबल ब्रांड्स: मैरियट, हिल्टन और रैडिसन जैसे बड़े ब्रांड भी टियर-2 और 3 शहरों में आ रहे हैं। वाराणसी में 'हिल्टन गार्डन इन' का विस्तार हो रहा है।
1.5 से 2 लाख रुपये के लक्जरी पैकेज:
अब श्रद्धालु 1.5 से 2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति तक के प्रीमियम पैकेज ले रहे हैं। इसमें चार्टर्ड विमान, हेलीकॉप्टर सेवा, 5-स्टार सात्विक भोजन, पर्सनल गाइड और VIP दर्शन जैसी सुविधाएं शामिल हैं। आधुनिक भक्त श्रद्धा के साथ साफ-सफाई, शुद्ध खान-पान और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहते।
अयोध्या 2030 विजन:
अनुमान है कि 2030 तक अकेले अयोध्या में 2,100 नए ब्रांडेड होटल कमरे उपलब्ध होंगे और 2028 तक यहां की पर्यटन अर्थव्यवस्था 18 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।